ज़िन्दगी ख़त्म होने वाली है ऐसा लगता है कुछ अधूरा है
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मेरे होंटों पे किसी लम्स की ख़्वाहिश है शदीद ऐसा कुछ कर मुझे सिगरेट को जलाना न पड़े
Umair Najmi
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हम इक ही लौ में जलाते रहे ग़ज़ल अपनी नई हवा से बचाते रहे ग़ज़ल अपनी दरअस्ल उस को फ़क़त चाय ख़त्म करनी थी हम उस के कप को सुनाते रहे ग़ज़ल अपनी
Zubair Ali Tabish
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क्या तुम तब भी ऐसे ही चुप-चाप तमाशा देखोगे इस मुश्किल में फँसने वाली अगर तुम्हारी बेटी हो
Zia Mazkoor
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मुझ ऐसा शख़्स अगर क़हक़हों से भर जाए ये साँस लेती उदासी तो घुट के मर जाए वो मेरे बा'द तरस जाएगा मोहब्बत को उसे ये कहना अगर हो सके तो मर जाए
Rakib Mukhtar
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रख के हर चीज़ भूलने वाली ला तेरा दिल सँभाल कर रख दूँ
Kumar Vishwas
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वक़्त जब ख़ास कोई आता है तब मिलता है ये ज़माना है ज़रूरत के सबब मिलता है
Qambar Naqvi
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जब हक़ीक़त में तुम्हें इरफ़ान-ए-ग़म हो जाएगा जिस क़दर टूटेगा ये दिल मोहतरम हो जाएगा
Qambar Naqvi
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रफ़तार इतनी तेज़ थी सैलाब-ए-दर्द की आँखों के बाँध तोड़ के आँसू निकल पड़े फिर भी न आफ़ताब की गैरत को आया होश तारीकियाँ मिटाने को जुगनू निकल पड़े
Qambar Naqvi
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निकालूँ कैसे मैं दो दिन की ज़िन्दगी में वक़्त पचास काम मिरे एक दिन में रहते हैं
Qambar Naqvi
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अब रहम कोई खाएगा क्या मेरे हाल पर जब तुम ने मुझ को छोड़ दिया मेरे हाल पर मुसतक़बिल अच्छा गुज़रेगा अपना न जाने कब माज़ी भी मुस्कुराने लगा मेरे हाल पर
Qambar Naqvi
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