बहार लब पा हँसी की न जाने कब गुज़री बगैर अश्क बहाए न कोई शब गुज़री
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हिज्र में तुम ने केवल बाल बिगाड़े हैं हम ने जाने कितने साल बिगाड़े हैं
Anand Raj Singh
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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चाय पीते हैं कहीं बैठ के दोनों भाई जा चुकी है ना तो बस छोड़ चल आ जाने दे
Ali Zaryoun
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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जाने क्या कुछ कर बैठा है बहुत दिनों से घर बैठा है वो मधुमास लिखे भी कैसे शाखों पर पतझर बैठा है
Vigyan Vrat
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वक़्त जब ख़ास कोई आता है तब मिलता है ये ज़माना है ज़रूरत के सबब मिलता है
Qambar Naqvi
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ज़िन्दगी ख़त्म होने वाली है ऐसा लगता है कुछ अधूरा है
Qambar Naqvi
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जब हक़ीक़त में तुम्हें इरफ़ान-ए-ग़म हो जाएगा जिस क़दर टूटेगा ये दिल मोहतरम हो जाएगा
Qambar Naqvi
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बंद लफ्ज़ों में एक बात कहूँ आप जैसा कोई शरीफ़ नहीं
Qambar Naqvi
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रफ़तार इतनी तेज़ थी सैलाब-ए-दर्द की आँखों के बाँध तोड़ के आँसू निकल पड़े फिर भी न आफ़ताब की गैरत को आया होश तारीकियाँ मिटाने को जुगनू निकल पड़े
Qambar Naqvi
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