जहाँ बाम-ए-फ़लक पे चाँद चमका हो वहाँ तारे भी अपना हक़ जताते हैं
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ईद का चाँद तुम ने देख लिया चाँद की ईद हो गई होगी
Idris Azad
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जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
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दो जहाँ की ज़िंदगी जीकर चले हैं दो घड़ी मरते-मरते फिर मुझे कुछ और मरने दीजिए
nakul kumar
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उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
Iftikhar Naseem
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उस ने खिड़की से चाँद देखा था मैं ने खिड़की में चाँद देखा है
Zubair Ali Tabish
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नाम से अब मिरे महफ़िल भी सजाने वो लगा फिर भरी महफ़िलों में नज़रें चुराने वो लगा छोड़ के आज मुझे ग़म के घराने में वो अपना अहबाब किसी और को बनाने वो लगा
Saba Rao
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तिरे कहने पे क्या मैं आम हो जाऊँ बिना ही बात के नीलाम हो जाऊँ
Saba Rao
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यतीमों का ख़ुदा ने घर बसाया है गरीबों को भी उन का हक़ दिलाया है ज़ुलैख़ा की तरह तू माँग मौला से जिसे दिल की तिजोरी में छुपाया है
Saba Rao
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सनम जिस दर्द-ए-दिल में मुब्तला है तू मैं ऐसे दर्द-ए-दिल की बाम हो जाऊँ
Saba Rao
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गुलों की ख़ुशबू से महकी अदा हूँ मैं यूँँ काँटों में बिखर के आम हो जाऊँ वफ़ादारी मोहब्बत में निभा ले तू बड़ी शिद्दत से मैं बदनाम हो जाऊँ
Saba Rao
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