जी में है इतने बोसे लीजे कि आज महर उस के वहाँ से उठ जावे
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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मु-ए-जुज़ 'मीर' जो थे फ़न के उस्ताद यही इक रेख़्ता-गो अब रहा है
Mushafi Ghulam Hamdani
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'मुसहफ़ी' फ़ारसी को ताक़ पे रख अब है अशआर-ए-हिंदवी का रिवाज
Mushafi Ghulam Hamdani
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डाल कर ग़ुंचों की मुँदरी शाख़-ए-गुल के कान में अब के होली में बनाना गुल को जोगन ऐ सबा
Mushafi Ghulam Hamdani
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सादगी देख कि बोसे की तमअ रखता हूँ जिन लबों से कि मुयस्सर नहीं दुश्नाम मुझे
Mushafi Ghulam Hamdani
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शब जो होली की है मिलने को तिरे मुखड़े से जान चाँद और तारे लिए फिरते हैं अफ़्शाँ हाथ में
Mushafi Ghulam Hamdani
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