जीना मरना मेरा दुश्वार हुआ करता था मैं किसी शक्स का बीमार हुआ करता था
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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वो मेरी रूह तक क़ब्ज़ा चुकी है मैं जिस को छोड़ जाना चाहता हूँ
Rohit tewatia 'Ishq'
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वो जिस की हो चुकी है मुझ से पहले मेरी रानी का वो राजा नहीं है
Rohit tewatia 'Ishq'
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ज़माना जल उठा मेरे उजाले से कुछ अच्छा सोच कर रौशन हुआ था मैं
Rohit tewatia 'Ishq'
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ज़माने में नहीं अब माँग इस की तभी ये इश्क़ सस्ता हो रहा है
Rohit tewatia 'Ishq'
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फूल खिलते ही बता देती है ख़ुशबू क्या क्या वो जो हँस दे तो निहाँ राज़ खुला करते हैं
Rohit tewatia 'Ishq'
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