कभी फूलों की महफ़िल में ज़रा आओ यहाँ आ कर मोहब्बत का असर देखो
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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नाम से अब मिरे महफ़िल भी सजाने वो लगा फिर भरी महफ़िलों में नज़रें चुराने वो लगा छोड़ के आज मुझे ग़म के घराने में वो अपना अहबाब किसी और को बनाने वो लगा
Saba Rao
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तिरे कहने पे क्या मैं आम हो जाऊँ बिना ही बात के नीलाम हो जाऊँ
Saba Rao
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यतीमों का ख़ुदा ने घर बसाया है गरीबों को भी उन का हक़ दिलाया है ज़ुलैख़ा की तरह तू माँग मौला से जिसे दिल की तिजोरी में छुपाया है
Saba Rao
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सनम जिस दर्द-ए-दिल में मुब्तला है तू मैं ऐसे दर्द-ए-दिल की बाम हो जाऊँ
Saba Rao
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औरों की बातें सुन के झूठा मुझे बताया है बाग़ों में जब फूल खिले फ़ज़ा ने जश्न मनाया है
Saba Rao
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