कहाँ कहाँ पे उसे ढूँढ़ते हैं हम यारों किसी के लम्स से होता था जो सुकूँ दिल को
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हर कोई सब्र की तलक़ीन किया करता है पर कोई ये तो बताए कि करूँँ मैं, कैसे?
Afzal Ali Afzal
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कुछ तो करें कि दिल ये कहीं और जा लगे कुछ देर के लिए सही आँखों को चैन हो
Afzal Ali Afzal
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गर अदीबों को अना का रोग लग जाए तो फिर गुल मोहब्बत के अदब की शाख़ पर खिलते नहीं
Afzal Ali Afzal
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ऐसी हैं क़ुर्बतें के मुझी में बसा है वो ऐसे हैं फ़ासले के नहीं राब्ता नसीब
Afzal Ali Afzal
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काट पाऊँगा मैं कैसे ज़िंदगी तेरे बग़ैर तीन दिन का हिज्र मुझ को लग रहा है तीन साल
Afzal Ali Afzal
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