कैसी ये रग़बत कैसे हो क़रार जानाँ कर ले हम पे थोड़ा तो ए'तिबार जानाँ
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नेकी इक दिन काम आती है हम को क्या समझाते हो हम ने बे-बस मरते देखे कैसे प्यारे प्यारे लोग
Javed Akhtar
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कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते
Ahmad Faraz
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हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले कितने प्यारे हैं मुझे छोड़ के जाने वाले ज़िंदगी भर की मोहब्बत का सिला ले डूबे कैसे नादाँ थे तिरे जान से जाने वाले
Vipul Kumar
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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वो खड़ा है ग़ैर की चौखट पे जो वो हमारे दिल के अंदर था कभी
Sibgatullah Anwer
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वो मेरी है वो मेरी है फ़क़त मेरी ये बात सारी दुनिया को बताती है
Sibgatullah Anwer
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उस की बातों में खोया न कर हर दफ़ा सिर्फ़ क़िस्से हैं कोई हक़ाइक नहीं
Sibgatullah Anwer
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तेरी आँखों से बहते-बहते ही इक दिन मैं ने दरिया हो जाना है
Sibgatullah Anwer
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वो जिसे तुम ने अभी फंदा कहा उस गले का श्रेष्ठ जेवर था कभी
Sibgatullah Anwer
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