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कर दिया क़ुर्बान इक ख़्वाहिश मियाँ दुश्मन-ए-जाँ अब मनाओ जश्न तुम

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साँस लेने के भी पैसे देने होंगे इस क़दर महँगाई बढ़ती जा रही है

Shubham Rai 'shubh'

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मौन लोगों देख कर हैरत नहीं होती या तुम्हारी भावना आहत नहीं होती क़ुछ कड़े क़ानून जो इस देश में होते बेटियों की फिर यहाँ दुर्गत नहीं होती

Shubham Rai 'shubh'

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सुनाते नहीं थे सुनाना पड़ा है उसे दर्द मुझ को दिखाना पड़ा है मुहब्बत सफ़र है मुसाफ़िर हैं हम भी सो दिल को ठिकाना बनाना पड़ा है

Shubham Rai 'shubh'

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जैसे क़िस्मत आज़माना होता है उस तरह अब दिल लगाना होता है ये खुले गेसू नशीली आँखें बस और क्या दिल हार जाना होता है

Shubham Rai 'shubh'

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किसी पल ये क़िस्मत बदल सकती है वो सज-धज के घर से निकल सकती है लगाना है दिल तो सँभल कर ज़रा किसी की वो अरमाँ कुचल सकती है

Shubham Rai 'shubh'

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