ख़ाक हुआ तो वजूद फिर से मिट्टी के साथ बाँधा गया मैं वो बदनसीब पत्थर था जो चिट्ठी के साथ बाँधा गया
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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साक़िया तेरे इस जहाँ में क्या मिलेगा बहुत ढूँढूँगा तो ख़ुदा मिलेगा
Murli Dhakad
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ये हमें किस ने वर्चस्व की लड़ाई दी जो है ही नहीं उसे खोते हम हैं है सारी रात का दर्द हम कुत्तों को हो कोई उदास रोते हम हैं
Murli Dhakad
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ये कैसा तजुर्बा है कि दिल जलाने पे अक्सर अँधेरा छा जाता है रौशनी नहीं होती
Murli Dhakad
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अपने इरादों को अपनी जेब में रखा है टटोलते टटोलते आस्तीन फट गई है
Murli Dhakad
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आब-ओ-दाने के ख़ातिर एक चिड़िया ख़ुद पिंजरे में आ बैठती है
Murli Dhakad
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