खिड़कियाँ खोल सुब्ह होने को है चाँद भी यार अब तो सोने को है उड़ चुके हैं परिंदे भी अब तो साँस फसलें नई ये बोने को है
Related Sher
लौट कर नहीं आता कब्र से कोई लेकिन प्यार करने वालों को इंतिज़ार रहता है
Shabeena Adeeb
85 likes
हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
96 likes
उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
Iftikhar Naseem
95 likes
ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है
Varun Anand
96 likes
घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
294 likes
More from Lalit Mohan Joshi
कहो हमें भला बुरा या कुछ भी तुम यहाँ मगर कहे जो सच वो आइना भी पास हो
Lalit Mohan Joshi
0 likes
ज़बाँ मीठी रखो या तल्ख़ तुम मगर सच कहने की आदत रखो
Lalit Mohan Joshi
3 likes
मैं भले इस बज़्म में अनजान हूँ बा'द मरने के तो गाया जाएगा
Lalit Mohan Joshi
3 likes
मुश्क आने मौत की मुझ को लगी इश्क़ दुनिया करने ही मुझ को लगी क्या कहूँ मैं ऐसी नादानी को अब प्यार में फिर छलने भी मुझ को लगी
Lalit Mohan Joshi
3 likes
फूल मुरझा अब गया है काट जब वो डाल दी है
Lalit Mohan Joshi
3 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Lalit Mohan Joshi.
Similar Moods
More moods that pair well with Lalit Mohan Joshi's sher.







