ख़ुद आँसू बनने तक ये दिल रोता है अपनों के मर जाने पे यूँॅं होता है
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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ये दुनिया जो अपनों को भी याद नहीं अब करती है मुझ को याद रखेगी इस उम्मीद पे ही दम तोड़ा हूँ
SHIV SAFAR
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वो अब मेरा नहीं ये मानना आसाँ यूँँ हो जाए बराबर एक्स के कुछ मान लेना जितना आसाँ था
SHIV SAFAR
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उड़ानें ऊंँची भरते हैं वो जिन के पर नहीं होते जो अक्सर घर बनाते हैं उन्हीं के घर नहीं होते
SHIV SAFAR
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मैं तो उन को जाने कब का भूल गया वो जो जिन के गालों पर तिल काला था यारो लेकिन भूल न पाया आज तलक उस को जिस के सीने में दिल काला था
SHIV SAFAR
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साथ इक दूजे के हम होते जनाब पास फिर इतने न ग़म होते जनाब मुझ सेे ही होती समुंदर में नमी दुख जो रो लेने से कम होते जनाब
SHIV SAFAR
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