ख़ुद ही ख़ुदस कट गया है बे-सहारा आदमी चल रही है लाश लेकिन मर चुके एहसास हैं
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं सब के दिल से उतर गया हूँ मैं
Jaun Elia
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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तुम्हें जब वक़्त मिल जाए चले आना कभी मिलने उभर आई हैं कुछ बातें वही सब बात करनी हैं तिरी आँखों में रह कर फिर नए कुछ दिन उगाने हैं तिरी ज़ुल्फ़ों तले वो कुछ पुरानी रात करनी हैं
nakul kumar
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कुछ नहीं है ज़िंदगी बर्बाद है अब तो मर गया हूँ मैं मुहब्बत को मनाने में कैसे भी गर हो सके मुझ को रिहा कर दे रह नहीं सकता मैं अब इस क़ैद-ख़ाने में
nakul kumar
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मुझे मिलने को आई है बड़े दिन बा'द बेचारी हॅंसी है खिल खिलाई है बड़े दिन बा'द बेचारी मेरी बंजर ज़मीं पे वो बनी सरसों सुनहरी सी भरी पूरी उग आई है बड़े दिन बा'द बेचारी
nakul kumar
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कौन तेरे घर की दीवारें चौखट चूमेगा कौन तेरी आँखों में अपनी आँखें रोपेगा
nakul kumar
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तेरे जाने के बा'द ये मुझे महसूस हुआ है तेरे आने के बा'द भी बहारें आ नहीं सकतीं
nakul kumar
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