ख़ुशबू फूलों से ख़फ़ा बैठी है राज वो गया है बाग़ से कुछ इस तरह
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Ahmad Faraz
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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वक़्त पर कामयाब होना दोस्त वक़्त वरना बहुत लगेगा दोस्त
Raj Tiwari
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न कश्ती पर न साहिल पर न ही दरिया पर आएगा अगर तू डूबा तो इल्ज़ाम तेरे ही सर आएगा
Raj Tiwari
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मुस्कुराता हुआ ये गुलशन-ए-आफ़ाक़ मिरा यहाँ हर शाम तेरी ख़ुशबू बिखर जाती है
Raj Tiwari
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मुस्कुराता हुआ इक चेहरा हमें याद आया शीशा देखा तो कोई अपना हमें याद आया
Raj Tiwari
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वो ग़म-शनास है पर मेरा ग़म-गुसार नहीं पसंद करता हूँ उस को पर उस से प्यार नहीं जिगर के पार हुआ था तिरे कमाँ का तीर किसी के तीर में वरना तो ऐसी धार नहीं
Raj Tiwari
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