लिया कश ज़िन्दगी का जो तिरी सूरत उभर आई
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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ईद का चाँद तुम ने देख लिया चाँद की ईद हो गई होगी
Idris Azad
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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मंज़िलों का कौन जाने रहगुज़र अच्छी नहीं उस की आँखें ख़ूब-सूरत है नज़र अच्छी नहीं
Abrar Kashif
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ज़ुल्फ़ों में सजा मुझे लो अपनी तुम बना के गुल बन सदा-बहार मैं खिला रहूँगा साए में
Abha sethi
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ज़ीस्त की आभा मरम्मत में कई ख़ुशनुमा लम्हे जिए बिन बह गए
Abha sethi
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तशक्कुर बे-वफ़ाई का सनम तेरी लगे पढ़ने हमें अब तुम भी शिद्दत से
Abha sethi
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पाया न तुम्हें खो बैठे ख़ुद को ही हम पागल इस दिल ने भी की नादानी है
Abha sethi
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वतन महबूब अपना, इश्क़ शिद्दत से निभाते हम मुकर्रर इक न दिन है इश्क़ हर लम्हा जताते हम हैं था में हाथ रखते जान भी क़ुर्बान उस पर ही लिपट आँचल तिरंगे में फ़ना उस के हो जाते हम
Abha sethi
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