माना कि आज भी मैं पढ़ती नहीं नमाज़ लेकिन ख़ुदा क़सम काफ़िर नहीं हूँ मैं
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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यार उस ने अब निशाना तय किया जाँ मगर पहले दिवाना तय किया वो सफ़र से लौट कर जो आ गया यार पहले ही ठिकाना तय किया
Arohi Tripathi
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दाग़ दामन पर तुम्हारे जब लगे ये न तुम भी देख पाए कब लगे ठीक उस ने तब निशाना तय किया तीर सीने में तुम्हारे जब लगे
Arohi Tripathi
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शाहज़ादे पता नहीं तुम को तुम पे कितनी कनीज़ मरती हैं
Arohi Tripathi
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तुम्हारा दिल नहीं तोडूँगी जानी मगर तुम को नहीं छोडूँगी जानी मोहब्बत में हुआ है जो हुआ है कलाई अब नहीं मोडूँगी जानी
Arohi Tripathi
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राम लिखने लगी मैं काग़ज़ पर काम आसान हो गए मेरे
Arohi Tripathi
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