मसरूफ़ियत में ही मिली आख़िर ख़ुशी हमें फ़ुर्सत मिली तो याद फिर आने लगे हैं ग़म
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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वो बिल्कुल फूल सी बच्ची है यारो सड़क पर फूल लेकिन बेचती है
Shriyansh Qaabiz
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मिरे किरदार का मरना ही शायद कहानी की ज़रूरत बन गया था
Shriyansh Qaabiz
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किसी का दिल बहुत रौशन हुआ है किसी के दिल में जाले लग रहे हैं
Shriyansh Qaabiz
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यहाँ सब लोग रोते ही मिले हैं कहानी इतनी अच्छी जा रही है
Shriyansh Qaabiz
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तुम ने जिस घर को हिस्सों में बाँटा है बीस बरस लगते हैं इक बनवाने में
Shriyansh Qaabiz
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