मौत मोहब्बत और माशूक़ा सब सेे आनाकानी है मेरे इतने सारे दुखड़े कौन सहेगा मेरे साथ
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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ज़िन्दगी अपने लिए ख़ुद मौत बोती जाएगी शाम होते ही घनेरी रात होती जाएगी एक दिन मेरी चिता तैयार कर लेंगे सभी और फिर शाम-ओ-सहर बरसात होती जाएगी
nakul kumar
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कहो क्या हो गया जो मिल न पाए यार से अपने निहारो चाँद को फिर यार के घर द्वार को देखो
nakul kumar
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ज़ख़्म तारी है साँस भारी है इस तरह ज़िंदगी गुज़ारी है मुझ पे हावी है जैसे तन्हाई और हल्की सी बे-क़रारी है
nakul kumar
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मैं खड़ा हूँ दोस्तों के बीच में ऐसे गौकशों के गाँव में गैया खड़ी जैसे
nakul kumar
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अब तो होने से रहा जज़्बात पे क़ाबू एक बुलबुल ने कहा है बाज को बाबू घर से निकले हैं मगर राहें नहीं देखीं पत्थरों में ढूँढ़ते फिरते हैं जो आबू
nakul kumar
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