मंज़िल कि जुस्तजू में गुम हो रहा हमेशा किस अक्स को तलाशूँ अँधियार में यहाँ मैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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यूँँ ज़ोर से ना दे दुहाई, ज़ुल्म सहता शख़्स तू रूठे ख़ुदा ना और भी, तेरा ख़ुदा है सो रहा
Zain Aalamgir
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ज़िन्दगी बर्बाद होती है ख़ुशी को ढूँढ़ते गर निकलते ढूँढ़ने दुख को, मिली होती ख़ुशी
Zain Aalamgir
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ये सोच मत जो जिस्म बिन कपड़ा दिखूँ मैं घूमता ज़ख़्मी फिरूँ हर सू मगर मुझ पर दु'आओं का करम
Zain Aalamgir
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वो क्या अगर सब गुफ़्तगू खुद सेे किए हम जा रहे ना दिख बुतों में और ना ही दिख फ़लक में वो ख़ुदा
Zain Aalamgir
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था महज़ तुम्हें भरोसा यार करना हो न पाया और मोहब्बत मुझे करनी यही कर यार पाया
Zain Aalamgir
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