मुहब्बत इक तराना है, जिसे रो रो के गाना है मज़े की बात तो है ये के फिर भी मुस्कुराना है
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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कंठ में तुलसी की माला माथ पर चंदन तिलक है कृष्ण की वो है दुलारी दिल जिसे मैं दे चुका हूँ
Alankrat Srivastava
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हूँ कैसा आदमी संकट में हँसता जा रहा हूँ मैं बुरे हर काम कर के भी सभी को भा रहा हूँ मैं ज़माने भर के दिल को तोड़ के आया हूँ मैं औ अब उन्हीं के दुख को अपना दुख बता कर गा रहा हूँ मैं
Alankrat Srivastava
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ज़िन्दगी की उलझनों की फ़िक्र करना छोड़ कर हम तेरी ज़ुल्फों में उलझने की तमन्ना कर रहे हैं
Alankrat Srivastava
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देख दुनिया आँख होने पे था पछताया बहुत फिर तुम्हें देखा इन्हीं से और इतराया बहुत
Alankrat Srivastava
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काम की सीख दे भी रहें हैं तो वो वो जो ख़ुद हाथ अपना मसलते रहे
Alankrat Srivastava
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