mujhe manzur gar tark-e-ta'alluq hai raza teri magar tutega rishta dard ka aahista aahista
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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गली के मोड़ पे बच्चों के एक जमघट में किसी ने दर्द-भरे लय में माहिया गाया मुझे किसी से मोहब्बत नहीं मगर ऐ दिल ये क्या हुआ कि तू बे-इख़्तियार भर आया
Ahmad Nadeem Qasmi
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तुझ से किस तरह मैं इज़हार-ए-तमन्ना करता लफ़्ज़ सूझा तो मआ'नी ने बग़ावत कर दी
Ahmad Nadeem Qasmi
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जो दिल दुखा है तो ये अज़्म भी मिला है हमें तमाम उम्र किसी का न दिल दुखाएँगे हम
Ahmad Nadeem Qasmi
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मैं तो उस वक़्त से डरता हूँ कि वो पूछ न ले ये अगर ज़ब्त का आँसू है तो टपका कैसे
Ahmad Nadeem Qasmi
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उस वक़्त का हिसाब क्या दूँ जो तेरे बग़ैर कट गया है
Ahmad Nadeem Qasmi
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