मुझ को यहाँ पहचानने वाले बहुत से हैं मगर मुझ को यहाँ पर जानने वाला तो कोई भी नहीं
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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फिर मुहब्बत करने की जब सोची मैं ने यार फिर हिजरत की आई याद मुझ को
AMAN RAJ SINHA
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जो देखते थे दुनिया मेरी आँखों से कभी ऑंखें वही दिखा रहे हैं मुझ को आजकल
AMAN RAJ SINHA
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एक ये भी तल्ख़ सच है ज़िंदगी का मेरे दोस्त शख़्स कोई सिर्फ़ मेरा तो कभी होता नहीं
AMAN RAJ SINHA
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परेशानी कभी मेरी बिना बोले समझ जाओ ज़बाँ से हर दफ़ा बोलूँ ज़रूरी तो नहीं है ना
AMAN RAJ SINHA
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हम दोनों के ग़म एक जैसे ही हैं दोस्त हम दोनों ही तन्हा बचे इस शहर में
AMAN RAJ SINHA
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