नफ़रतों के झंडों को अब मुझे गिराना है प्यार के चराग़ों को अब मुझे जलाना है
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ये ख़ता है तो क्यूँ ये ख़ता है जिस में जाँ हम ही तुम पे फ़िदा हैं
Danish Balliavi
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हम ग़रीबों का रहनुमा है इश्क़ हम मरीज़ों की इक दवा है इश्क़ इश्क़ को वो समझ न पाएगा जो ये कहता है मसअला है इश्क़
Danish Balliavi
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यहाँ भी लोग नहीं डरते दिल लगाने से ये है वो आग जो बुझती नहीं बुझाने से
Danish Balliavi
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तुम ने जब दिल ही लगाया तो झिझकना कैसा जान की याद में आशिक़ ये सिसकना कैसा
Danish Balliavi
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तुम मेरी साँसों में बसते हो हरदम दिल मेरा क्यूँ तोड़ के हँसते हो ऐ सनम
Danish Balliavi
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