नज़र के सामने आख़िर जिगर की बात ही क्या है कई दिल मात खाते हैं तेरी तिरछी निगाहों से कभी हम को तुम्हारी बात भी अच्छी नहीं लगती कभी उठते नहीं बनता तेरी ज़ुल्फ़ों के सायों से
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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क़ल्ब का नाम क़ल्ब होता है अक़्ल का नाम जी-हुज़ूरी है
Rakesh Mahadiuree
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उस एक शख़्स को हम भूलने की कोशिश में न जाने कितनी दफ़ा उस को याद कर बैठे
Rakesh Mahadiuree
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तुम दिवाने लगते हो तुम कहाँ से आए हो तुम जहाँ भी बैठोगे रतजगा हो जाएगा
Rakesh Mahadiuree
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हर ख़राब चीज़ में भी ठीक चीज़ है दुनिया भी हसीन है ये दिलरुबा के साथ
Rakesh Mahadiuree
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सबका मिलना दोस्त कहाँ हो पाता है हम जैसों को हसरत ज़िंदा रखती है
Rakesh Mahadiuree
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