sherKuch Alfaaz

नज़र ख़ामोश रहती है अदाऍं बात करती हैं सँवर कर जब निकलती है तो राहें बात करती हैं है भोलापन अदाओं में सभी के सामने उस का मुझे मालूम है उस की निगाहें बात करती हैं

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उस ने मेरी आँखों पर चुपके से आ कर हाथ रखे इक चुम्बन होंठों पर ले कर यूँँ सारे जज़्बात रखे देख तुम्हें बस मेरे मन से एक दुआ ये उठती है मालिक इस जीवन भर मुझ को यार तुम्हारे साथ रखे

Prashant Arahat

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सितम ये है हमें वो आज आवारा समझते हैं जिन्हें हम आज भी सच में बहुत प्यारा समझते हैं हमारे दिल के सागर में कभी तुम डूबकर देखो इसे तो बे–वजह ही लोग बस ख़ारा समझते हैं

Prashant Arahat

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छोड़ गई है मुझ को तो इस की कोई परवाह नहीं उस सेे अच्छी लड़की से अब इश्क़ हमारा चलता है

Prashant Arahat

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उगाई फ़स्ल मैं ने थी बड़ी मेहनत लगाकर के मगर बेवक़्त बारिश ने तबाही सी मचाई है

Prashant Arahat

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तुझे ही चाहता हूँ मैं तेरा ही ख़्वाब आता है तेरे दीदार को अब भी मेरी आँखें तरसती हैं

Prashant Arahat

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