निकाला क़ब्र से मुर्दे को और फिर मारा है उस ने बुलाया था कभी मँगनी में और अब कार्ड शादी का
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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आप की आँखें अगर शे'र सुनाने लग जाएँ हम जो ग़ज़लें लिए फिरते हैं, ठिकाने लग जाएँ
Rehman Faris
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तू मिला ही नहीं मगर फिर भी है बिछड़ने का मुझ को डर फिर भी जानता हूँ तू आ नहीं सकता पर सजाया है मैं ने घर फिर भी
Sandeep Thakur
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मेरी चाहत किसी आँगन की तुलसी है मैं कैसे घर में लाऊँ माँ कोई तुलसी
100rav
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ये नदी भी पूछती है यार कितने गहरे हो तुम
100rav
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सभी कहते हैं दुनिया गोल है तो तू फिर से क्यूँ नहीं टकराता मुझ सेे
100rav
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ये दुनिया थी आज़ाद पंछी बना दी किसी ने घड़ी यार
100rav
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तड़पता तू भी हाँ मिलने को मुझ सेे अगर मैं तेरे हिस्से में न होता
100rav
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