पढ़ने को है बहुत किताबें पास मगर हैरत है, मैं उस की आँखें पढ़ता हूँ
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मैं साँसें तक लुटा सकता हूँ उस के इक इशारे पर मगर वो मेरे हर वादे को सरकारी समझता है
Rahat Indori
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हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और
Mirza Ghalib
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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम पगला गए हैं आप के चू में हुए दरख़्त
Varun Anand
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उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
Iftikhar Naseem
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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मैं अकेला ही नहीं था इश्क़ में जो लिखे उस ने वो ख़त भी देखिए काग़ज़ी है इश्क़ अब तो मानिए काग़ज़ों पर दस्तख़त भी देखिए
Ravi 'VEER'
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इज़हारों पर पर्दा डालो इश्क़ उतारो सर से अपने वरना इक दिन मरना तुम को जीने से आसान लगेगा
Ravi 'VEER'
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देखिए ये डिग्रियाँ दीवार पर धूल की इन पर परत भी देखिए देखिए सच देश के हालात का और क्या इस में ग़लत भी देखिए
Ravi 'VEER'
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शा'इरी ये हुस्न और ये इश्क़ की बातें जनाब इक समय तक ठीक है फिर छोड़ देनी चाहिए
Ravi 'VEER'
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अक्सर इक पल में आँगन से जैसे चिड़िया उड़ जाती है ख़्वाब अधूरे रह जाते हैं मेरी निंदिया उड़ जाती है
Ravi 'VEER'
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