फिर वही हम गुनाह कर रहे हैं ख़ुद ख़ुदी को तबाह कर रहे हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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ये हाथ उस के हाथ में होते हम कब धुएँ के साथ में होते
Manoj Devdutt
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ज़मीं से जब जुदा तू हो नहीं सकता यहाँ पर फिर ख़ुदा तू हो नहीं सकता
Manoj Devdutt
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ज़ौक़-ए-मोहब्बत चख लिया हम ने और जानने को कुछ नहीं है अब
Manoj Devdutt
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सितम्बर को सितमगर लिखते हैं यही तो हम सुख़न-वर लिखते हैं
Manoj Devdutt
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तुम कभी मेरे लिए तो साबिक़ा होगी नहीं फिर यहाँ कोई तुम्हारे बा'द आएगा नहीं
Manoj Devdutt
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