phul ki khushbu hawa ki chap shishe ki khanak kaun si shai hai jo teri khush-bayani mein nahin
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क्या तुम तब भी ऐसे ही चुप-चाप तमाशा देखोगे इस मुश्किल में फँसने वाली अगर तुम्हारी बेटी हो
Zia Mazkoor
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हर शे'र हर ग़ज़ल पे है ऐसी छाप तेरी तस्वीर बन रही है इक अपने आप तेरी तेरे लिए किसी को इतना दीवाना देखा लगने लगी है मुझ को चाहत भी पाप तेरी
Sandeep Thakur
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चारों तरफ़ बिखर गईं साँसों की ख़ुशबुएँ राह-ए-वफ़ा में आप जहाँ भी जिधर गए
Kumar Vishwas
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हाए क्या बदहवा से लम्हा है तेरे होते हुए भी तन्हा हूँ
Aks samastipuri
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जो चुप-चाप रहती थी दीवार पर वो तस्वीर बातें बनाने लगी
Adil Mansuri
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लगता है कई रातों का जागा था मुसव्विर तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है
Unknown
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कई जवाबों से अच्छी है ख़ामुशी मेरी न जाने कितने सवालों की आबरू रक्खे
Unknown
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लजा कर शर्म खा कर मुस्कुरा कर दिया बोसा मगर मुँह को बना कर
Unknown
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एक बोसे के तलबगार हैं हम और माँगे तो गुनहगार हैं हम
Unknown
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नए साल में पिछली नफ़रत भुला दें चलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें
Unknown
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