पूजित तुलसी हर दिन बतलाती थी माँ सूरज से पहले उठ जाती थी मुझ को वैसे पढ़नी है ये दुनिया जैसे नानी मानस पढ़वाती थी
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Azhar Iqbal
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राम भी हैं कृष्ण भी हैं और भोलेनाथ हैं माँ तुम्हारे साथ हैं तो सब तुम्हारे साथ हैं
Tanoj Dadhich
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तू भी कब मेरे मुताबिक मुझे दुख दे पाया किस ने भरना था ये पैमाना अगर ख़ाली था एक दुख ये कि तू मिलने नहीं आया मुझ सेे एक दुख ये है उस दिन मेरा घर ख़ाली था
Tehzeeb Hafi
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होते थे मेरे भी अपने पास मेरे अब तो है कुछ तन्हा रस्ते पास मेरे वो तो हर दिन अपना रंग बदलती है दो जोड़ी कपड़े हैं गिनके पास मेरे
Aman Mishra 'Anant'
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जब उस के ठुकराए आते है दुनिया से उकताए आते है पहले तुम आती थी सपनों में अब सपनों में साए आते है
Aman Mishra 'Anant'
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अपने हाथों को बना पतवार जाते राम का ले नाम दरिया पार जाते हम ने झूठी जीत से ढाढस बढ़ाया मान लेते हार तो फिर हार जाते
Aman Mishra 'Anant'
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बबूलों में किसी उलझे बदन सी होने लगती है जो तेरे बिन कोई छू ले चुभन सी होने लगती है बिना तन्हाई के इक पल रहा जाता नहीं मुझ सेे किसी से बात कर लूँ तो घुटन सी होने लगती है
Aman Mishra 'Anant'
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उलझा कर जिस को ये दुनिया रखती है सादा सी प्यारी सी अच्छी लड़की है
Aman Mishra 'Anant'
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