प्यार व्यार और नाटक देखो काम कितना है एक जिस्म पाने में ताम-झाम कितना है
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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यूँँ पाँव पाँव चला उम्र भर मगर देखो चला जहाँ से था मैं लौट के वहीं पहुँचा नहीं ये बात नहीं तय सफ़र किया ही नहीं रहा सफ़र में ही फिर भी कहीं नहीं पहुँचा
Mohit Subran
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उबलते अश्क न रख रोक के बहा दे इन्हें कहीं ये अश्क न पलकें तिरी जला डालें
Mohit Subran
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तुम्हें तो यार मुयस्सर है बस ख़ुशी ही ख़ुशी तुम्हारा क्या जिसे चाहो उसे उदास करो
Mohit Subran
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शे'र कहना है वो फ़न जो जान-ए-मन आसाँ नहीं 'जौन' ने जब ख़ून थूका तब कहीं ग़ज़लें हुईं
Mohit Subran
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निभा देते हैं गहरी दोस्ती जो हाल अच्छे हों अगर हो हाल ख़स्ता साथ तब कोई नहीं देता रहेंगे साथ सारे हाथ दोनों गर सलामत हों मगर हों हाथ टूटे हाथ तब कोई नहीं देता
Mohit Subran
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