रूह घर पर ही भूल आया था हम निहत्थे पे वार क्या करते
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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सब विदाई के वक़्त रोते हैं सोच उस वक़्त हँस रहा था मैं
Atul K Rai
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कोई तो है चिढ़ाता है जो मुझ को मैं आईने में जब भी देखता हूँ
Atul K Rai
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ज़रा सी देर उठने में हुई क्या लगे सब पाँव दक्षिण ओर करने
Atul K Rai
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ज़माना ग़ौर से सुनता है उन को मुखर जो मौन होना जानते हैं
Atul K Rai
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तुम्हारे प्रेम का अपमान होगा इस लिए जानाँ हमें रोना तो आता है मगर रोते नहीं हैं हम
Atul K Rai
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