सादा-मिज़ाज के हम आशिक़ निकल गए जो तोड़ ना गुलाब सके तो दुआ दिए
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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दबी कुचली हुई सब ख़्वाहिशों के सर निकल आए ज़रा पैसा हुआ तो च्यूँँटियों के पर निकल आए अभी उड़ते नहीं तो फ़ाख़्ता के साथ हैं बच्चे अकेला छोड़ देंगे माँ को जिस दिन पर निकल आए
Mehshar Afridi
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इतनी जल्दी क्या रहती है मिलने की सूट गुलाबी और दुप्पटा काला है
Tanoj Dadhich
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क़स में, वादे, दरवाज़े तो ठीक हैं पर ख़ामोशी को तोड़ नहीं सकता हूँ मैं
Tanoj Dadhich
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सब इंतिज़ार में थे कब कोई ज़बान खुले फिर उस के होंठ खुले और सबके कान खुले
Umair Najmi
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यूँँ ज़ोर से ना दे दुहाई, ज़ुल्म सहता शख़्स तू रूठे ख़ुदा ना और भी, तेरा ख़ुदा है सो रहा
Zain Aalamgir
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यार बूँद-ए-अश्क गिरने से ज़रा पहले तू आना मुंतज़िर रख फिर किनारा ये समुंदर का बनेगा
Zain Aalamgir
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थी दुआएँ इस हथेली पर लिखी, अब धुंदली है वजह है आँसू, कि सब मिटते चले जाते मुसलसल
Zain Aalamgir
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उजलत नहीं करना, किसी मंज़िल लिए मंज़िल कहीं पाने बहुत हो देर ना
Zain Aalamgir
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वक़्त गुज़रा नहीं यहाँ, समझो है गुज़ारा गया यहाँ हम सेे
Zain Aalamgir
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