सच बात है, इज़हार हम ने इश्क़ का उन सेे किया दीवार से उम्मीद है, वो बात हम सेे कर सके
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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ज़िन्दगी बर्बाद होती है ख़ुशी को ढूँढ़ते गर निकलते ढूँढ़ने दुख को, मिली होती ख़ुशी
Zain Aalamgir
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ये सोच मत जो जिस्म बिन कपड़ा दिखूँ मैं घूमता ज़ख़्मी फिरूँ हर सू मगर मुझ पर दु'आओं का करम
Zain Aalamgir
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ये दिल फिर हम किस सेे लगाएँगे जब दिल से किनारा कर आएँगे
Zain Aalamgir
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ज़िंदा रहा मैं आज भी यारों ग़ज़ब की बात है मज़लूम है बख़्शा गया क्या ख़ूब-सूरत रात है
Zain Aalamgir
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तुम दर-दरीचे बंद करते, के न आ कोई सके लेकिन बना चाबी रखी है मौत आने वास्ते
Zain Aalamgir
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