shahd-o-shakar se shirin urdu zaban hamari hoti hai jis ke bole mithi zaban hamari
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
Rahat Indori
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आपने मुझ को डुबोया है किसी और जगह इतनी गहराई कहाँ होती है दरिया में
Tehzeeb Hafi
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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
Shakeel Azmi
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टैंक आगे बढ़ें कि पीछे हटें कोख धरती की बाँझ होती है
Sahir Ludhianvi
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वो उम्मीद क्या जिस की हो इंतिहा वो वा'दा नहीं जो वफ़ा हो गया
Altaf Hussain Hali
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यही है इबादत यही दीन-ओ-ईमाँ कि काम आए दुनिया में इंसाँ के इंसाँ
Altaf Hussain Hali
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राज़ी हैं हम कि दोस्त से हो दुश्मनी मगर दुश्मन को हम से दोस्त बनाया न जाएगा
Altaf Hussain Hali
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हम ने अव्वल से पढ़ी है ये किताब आख़िर तक हम से पूछे कोई होती है मोहब्बत कैसी
Altaf Hussain Hali
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हम ने हर अदना को आ'ला कर दिया ख़ाकसारी अपनी काम आई बहुत
Altaf Hussain Hali
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