तोहफ़े देते ही रहते हो रेहान तुम भी कुछ उस सेे पा रहे हो क्या
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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जो इस को मज़हब से जोड़े ये उस की नादानी है उर्दू का कोई धर्म नहीं है उर्दू हिंदुस्तानी है
Rehan Umar
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अब तो तारीफ़ के बँधेंगे पुल माँ ने छेड़ी हैं लाल की बातें
Rehan Umar
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जिस जगह से इधर उधर हुए हम रोज़ जाता है उस जगह कोई
Rehan Umar
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अपनी खिड़की से झाँकती है वो जब रौशनी सी गली में होती है
Rehan Umar
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पूरी कर तब उस की माँग जब वो भर दे तेरी माँग
Rehan Umar
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