जो इस को मज़हब से जोड़े ये उस की नादानी है उर्दू का कोई धर्म नहीं है उर्दू हिंदुस्तानी है
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अब दोस्त कोई लाओ मुक़ाबिल में हमारे दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
Munawwar Rana
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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मौत का भी इलाज हो शायद ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं
Firaq Gorakhpuri
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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अब तो तारीफ़ के बँधेंगे पुल माँ ने छेड़ी हैं लाल की बातें
Rehan Umar
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अपनी खिड़की से झाँकती है वो जब रौशनी सी गली में होती है
Rehan Umar
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जिस जगह से इधर उधर हुए हम रोज़ जाता है उस जगह कोई
Rehan Umar
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पूरी कर तब उस की माँग जब वो भर दे तेरी माँग
Rehan Umar
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तोहफ़े देते ही रहते हो रेहान तुम भी कुछ उस सेे पा रहे हो क्या
Rehan Umar
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