जिस जगह से इधर उधर हुए हम रोज़ जाता है उस जगह कोई
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लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में
nakul kumar
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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प्यार का रिश्ता ऐसा रिश्ता शबनम भी चिंगारी भी या'नी उन सेे रोज़ ही झगड़ा और उन्हीं से यारी भी
Ateeq Allahabadi
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मैं क्या बताऊँ वो कितना क़रीब है मेरे मेरा ख़याल भी उस को सुनाई देता है वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है
Zubair Ali Tabish
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अब तो तारीफ़ के बँधेंगे पुल माँ ने छेड़ी हैं लाल की बातें
Rehan Umar
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जो इस को मज़हब से जोड़े ये उस की नादानी है उर्दू का कोई धर्म नहीं है उर्दू हिंदुस्तानी है
Rehan Umar
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नीड जिस की है वो नहीं मौजूद अच्छे मौसम का क्या करे कोई
Rehan Umar
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अपनी खिड़की से झाँकती है वो जब रौशनी सी गली में होती है
Rehan Umar
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पूरी कर तब उस की माँग जब वो भर दे तेरी माँग
Rehan Umar
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