अपनी खिड़की से झाँकती है वो जब रौशनी सी गली में होती है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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अब तो तारीफ़ के बँधेंगे पुल माँ ने छेड़ी हैं लाल की बातें
Rehan Umar
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जो इस को मज़हब से जोड़े ये उस की नादानी है उर्दू का कोई धर्म नहीं है उर्दू हिंदुस्तानी है
Rehan Umar
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जिस जगह से इधर उधर हुए हम रोज़ जाता है उस जगह कोई
Rehan Umar
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पूरी कर तब उस की माँग जब वो भर दे तेरी माँग
Rehan Umar
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नीड जिस की है वो नहीं मौजूद अच्छे मौसम का क्या करे कोई
Rehan Umar
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