तुम्हारी इन नशीली आँखों से जाम-ए-अदम पी कर हमें डर है ज़माने के ये वाइज़ मर नहीं जाएँ
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
Khumar Barabankvi
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगानी की लूटकर ख़ुशियाँ ज़ख़्म-ए-दिल मुझ को दे गया है कोई मेरी आँखों की वो था बीनाई मेरी बीनाई ले गया है कोई
Shajar Abbas
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ज़िंदगी से ख़ुश है कोई ज़िंदगी से तंग है हर किसी का ज़िंदगी जीने का अपना ढंग है मैं ने जो दुनिया को समझा तो मुझे आया समझ निस्फ़ है रंगीन दुनिया निस्फ़ ये बे-रंग है
Shajar Abbas
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ज़माना हो गया महताब देखे आँखों से ख़ुदा के वास्ते तस्वीर भेज दो अपनी
Shajar Abbas
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यूँँ लग रहा है क़तरा-ए-मय लब पर आप के जैसे किसी गुलाब की पत्ती पर ओस हो
Shajar Abbas
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यूँँ लग रहा है कू-ए-बुताँ में मुझे शजर जैसे मैं आज ख़ुल्द-ए-बरी में पहुँच गया
Shajar Abbas
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