उम्र से मेरी फ़नकारी को मत आँको उस्तादों से बेहतर ग़ज़लें कहता हूँ
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मैं उन्हीं आबादियों में जी रहा होता कहीं तुम अगर हँसते नहीं उस दिन मेरी तक़दीर पर
Zia Mazkoor
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अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
Munawwar Rana
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ख़ूब-सूरत ये मोहब्बत में सज़ा दी उस ने फिर गले मिल के मेरी उम्र बढ़ा दी उस ने
Manzar Bhopali
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बस एक मोड़ मिरी ज़िंदगी में आया था फिर इस के बा'द उलझती गई कहानी मेरी
Abbas Tabish
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मेरी दुनिया में कोई चीज़ ठिकाने पे नहीं बस तुझे देख के लगता है कि सब अच्छा है
Idris Babar
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'हर्ष' वस्ल में जितनी मर्ज़ी शे'र कह लो तुम हिज्र के बिना इन में जान आ नहीं सकती
Harsh saxena
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दुनिया के भरम को कुछ यूँँ तोड़ दिया मैं ने इस बार नसीबों का रुख़ मोड़ दिया मैं ने
Harsh saxena
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हासिल न कर पाया तुझे मैं मिन्नतों के बा'द भी उम्मीद सेंटा से लगाना लाज़मी भी है मिरा
Harsh saxena
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बेवफ़ाई ने तिरी मुझ को दिया है ये हुनर बस यार दुनिया में कहाँ हर भाग्य में ये फ़न लिखा है
Harsh saxena
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सारे सुर उस की ख़ुशामद में लगे हैं देखिए तो आज उस ने पैरों में पाज़ेब जो पहनी हुई है
Harsh saxena
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