उस ने मेरे रुख़सार पर जब होंठ रखे थे दिल उस के रक़ीबों के 'शजर' ख़ूब जले थे
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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ज़िंदगी उजड़े हुए घर की तरह लगती है बाप का साया अगर सर पे नहीं होता है
Shajar Abbas
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ज़िंदगी तो दर-ब-दर खिलवा रही थी ठोकरें मौत ने लो मंज़िल-ए-मकसूद पर पहुँचा दिया
Shajar Abbas
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ज़िंदगी को जो जाना तो ये जुज़ मिला ज़िंदगी दर्द है दर्द है ज़िंदगी
Shajar Abbas
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वो उस के गाल पे दरबान-ए-हुस्न बैठा है कोई उसे सुनो तिल का निशान मत कहना
Shajar Abbas
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ज़र्द होने लगी है दस्त-ए-हिना लौट आओ शजर ख़ुदा के लिए
Shajar Abbas
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