उसे इतना क़रीबी क्यूँँ बनाया 'कब्क' गया इक शख़्स तो महफ़िल गई जैसे
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा इतना मत चाहो उसे वो बे-वफ़ा हो जाएगा
Bashir Badr
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चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
Vikram Gaur Vairagi
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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मशीनेें दुनिया-भर की भी लगा दो चाहे तुम उस के दिल का रस्ता नईं बना पाओगे
Krishnakant Kabk
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कैसे हम को अलग करोगे हम इक दूजे के मानी हैं
Krishnakant Kabk
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सब को ही है तकलीफ़ किसी ना किसी से तो तकलीफ़ को बिल्कुल नहीं तकलीफ़ किसी से
Krishnakant Kabk
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शा'इरी का फ़न तुम भी सीख लो ज़रा हम सेे बस गिटार पर ही लड़की फ़िदा नहीं होती
Krishnakant Kabk
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न रूई हो तो अपने अश्कों से बाती बनाएँगे बुझा दीया हमारा तो हवा से लड़ भी जाएँगे बनाई रोज़ चौदह साल रंगोली बस इस ख़ातिर न जाने रामजी वनवास से कब लौट आएंँगे
Krishnakant Kabk
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