वा'दा करो कि रंज-ओ-मुसीबत के दौर में मेरे लिए दुआ में उठाओगे हाथ तुम
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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तस्वीर इक जला के बुझाता रहा हूँ मैं उस के ही पास लौट के जाता रहा हूँ मैं ये ना-तमाम ख़्वाब हक़ीक़त हों किस तरह हर पल तो अपनी नींद उड़ाता रहा हूँ मैं
Hasan Raqim
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ब-मंज़िल पर हूँ मगर ये मकाँ मंज़िल नहीं लगता सफ़र को भी मिरा अब कोई मुस्तक़बिल नहीं लगता
Hasan Raqim
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सोज़-ए-वफ़ा के नाम से अरमान थे बहुत लेकिन दयार -ए-इश्क़ से अंजान थे बहुत लगता था उन्हें इश्क़ की राहें हैं मुनाकिद आ कर के राह-ए-इश्क़ में हैरान थे बहुत
Hasan Raqim
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न हाथ आगे करूँँ सामने सिवाए तेरे न इतना देना कि मुझ को ग़ुरूर आ जाए
Hasan Raqim
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अपनी आदत है अगर होना तो बस एक दिल का कहने वाले इसी आदत को वफ़ा कहते हैं
Hasan Raqim
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