वो चाहता था लोग उस की फ़िक्र यूँँ करते रहें उस को ज़रा सा भी नहीं मतलब किसी के ग़म से है
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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हम भी गाँव में शाम को बैठा करते थे हम को भी हालात ने बाहर भेजा है
Zahid Bashir
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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जो देखते थे दुनिया मेरी आँखों से कभी ऑंखें वही दिखा रहे हैं मुझ को आजकल
AMAN RAJ SINHA
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परेशानी कभी मेरी बिना बोले समझ जाओ ज़बाँ से हर दफ़ा बोलूँ ज़रूरी तो नहीं है ना
AMAN RAJ SINHA
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यूँ देख कर तुझ को यही लगता है अब मासूमियत के तू ने पर्दे ओढ़े हैं
AMAN RAJ SINHA
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फिर मुहब्बत करने की जब सोची मैं ने यार फिर हिजरत की आई याद मुझ को
AMAN RAJ SINHA
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मैं उसे जब धोखे खाते देखता हूँ सोचता हूँ बे-वफ़ाई की सज़ा तो बे-वफ़ाई होती है दोस्त
AMAN RAJ SINHA
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