यक़ीं कर लो इन्हें पढ़ कर तुम्हीं ख़ुद कही है "मीर" ने दमदार ग़ज़लें
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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डर है घर में कैसे बोला जाएगा छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा
Vishal Singh Tabish
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बात कहनी थी ये बस उसी का हूँ मैं हर घड़ी याद में उस की रोता हूँ मैं सुन रही हो इसी भीड़ में वो मुझे बस इसी आस में गीत गाता हूँ मैं
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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ज़िंदगी के खाते से इक साल और कम हो गया है और बधाई दे रहे हैं लोग इक दूजे को इस की
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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अगर जो साथ है तेरा,मुझे किस बात की चिंता नसीबों से जो है मिलता,है भाई तू वही हीरा
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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अब ज़रूरी है नहीं मुझ को वसाइल कोई उस की यादों के सहारे ही जी लूँगा कुछ दिन
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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साथ हँसने लगे वो हँसी चाहिए उम्र भर के लिए बस यही चाहिए बिन तेरे हो अगर चार दिन ज़िंदगी एक पल भी नहीं ज़िंदगी चाहिए
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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