ज़िंदगी के खाते से इक साल और कम हो गया है और बधाई दे रहे हैं लोग इक दूजे को इस की
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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साथ हँसने लगे वो हँसी चाहिए उम्र भर के लिए बस यही चाहिए बिन तेरे हो अगर चार दिन ज़िंदगी एक पल भी नहीं ज़िंदगी चाहिए
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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ये ग़ुरूर-ए-दौलत टिकता नहीं ज़ियादा दिन लोग चाहते हैं अब राज हो मुहब्बत का
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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अब ज़रूरी है नहीं मुझ को वसाइल कोई उस की यादों के सहारे ही जी लूँगा कुछ दिन
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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अपने हिस्से की मोहब्बत बाँट कर ख़ैरात में चल दिए ख़ैरात में हम फिर मोहब्बत माँगने
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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बेटे जो भेजे हैं सरहद से बुला लो साहब कोख माँओं की उजड़ने से बचा लो साहब
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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