ये ही दुनिया है जहाँ कितने ही सूरज थे उगे प्यार के आख़िरी दीपक को बुझाने के लिए
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
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सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई
Allama Iqbal
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प्यार का रिश्ता ऐसा रिश्ता शबनम भी चिंगारी भी या'नी उन सेे रोज़ ही झगड़ा और उन्हीं से यारी भी
Ateeq Allahabadi
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शे'र मेरा सुन के अहल-ए-बज़्म तो ख़ामोश थी मेरे आगे लिखने वाले तब्सिरा करते रहे
Rakesh Mahadiuree
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पहले सी दिल में हुस्न की चाहत नहीं बची देखा है हम ने हुस्न को इतने क़रीब से
Rakesh Mahadiuree
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वो लड़का सूर्य था अपने समय का मुहब्बत खा गई फ़नकार साईं
Rakesh Mahadiuree
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दोस्ती में माँ बहन की गालियाँ बकना सब सेे गन्दी ज़्यादती है दोस्ती के साथ
Rakesh Mahadiuree
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हर ख़राब चीज़ में भी ठीक चीज़ है दुनिया भी हसीन है ये दिलरुबा के साथ
Rakesh Mahadiuree
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