ये ज़िन्दगी तन्हाई का आग़ाज़ करती जा रही तकरार करते थे कभी वो लोग अब चुप हो गए
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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उस में और शराब में बस फ़र्क इतना था जो पी कर और छू कर बहकने जितना था
arjun chamoli
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लाँछन लगा रहे हैं मेरे चरित्र पे जो गंदी करूँँ ज़बाँ क्यूँ ले कर मैं नाम उन का
arjun chamoli
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नक़ली आँसू झूठी क़स्में सब पर्दे हैं नज़ाकत के बस बाज़ार लगे हैं जज़्बों के सौदे हैं शराफ़त के ख़ुद-ग़रज़ी के हैं अल्फ़ाज़ मोहब्बत के अफ़साने में फिर भी लाते हैं चेहरे पर झूठे रंग इनायत के
arjun chamoli
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तड़प के रोए हैं चेहरा अगर छुपाया है कि लोग देख न ले आँख में समुंदर को
arjun chamoli
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भुला के छोड़ दिया उस गली में चलना भी कि दाग़ लगने न पाए किसी के दामन पर
arjun chamoli
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