ज़ोर चलता है औरत पे सो मर्द ख़ुश बीवी पे ख़त्म मर्दानगी की समझ
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तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुश नज़र थे मगर जो तुझ को देख चुका हो वो और क्या देखे
Parveen Shakir
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राम होने में या रावण में है अंतर इतना एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है
Kumar Vishwas
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मुझ सेे बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ सेे बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को
Naseer Turabi
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ठीक है मैं फेर लेता हूँ नज़र को तुम भी झुमके से कहो गर्दन न चू में नीरज नीर
Neeraj Neer
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इक दिए से एक कमरा भी बहुत है दिल जलाने से ये घर रौशन हुआ है
Neeraj Neer
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वहम होता है कि छूने से सँवर जाएँगी सोचता हूँ जो मुक़द्दर मिरा ज़ुल्फ़ें तेरी
Neeraj Neer
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फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक
Neeraj Neer
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सिवाए तालियों के कुछ नहीं मिलता ग़ज़लगोई फ़क़त धंधा सुकूँ का है
Neeraj Neer
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